Volume-10, Issue-2 (July-December)
2023
Pages: 12-21
Open Access
महिला उद्यमिता और सूचना प्रौद्योगिकी: ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बाजारों का अध्ययन
राज लक्ष्मी
India
Abstract
सारांश
भारत में महिला उद्यमिता का स्वरूप सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बाजारों के विस्तार के कारण तीव्र रूप से बदल रहा है। पहले महिला उद्यमिता प्रायः स्थानीय बाजार, घरेलू उत्पादन, सीमित पूँजी और पारिवारिक नेटवर्क पर निर्भर थी, परंतु डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने बाजार-प्रवेश, भुगतान-सुविधा, ग्राहक-संपर्क, प्रचार, आपूर्ति-श्रृंखला और वित्तीय पहचान की नई संभावनाएँ निर्मित की हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है तथा सरकारी रिपोर्टों, MSME वार्षिक प्रतिवेदनों, डिजिटल भुगतान संबंधी PIB/RBI/NPCI स्रोतों, IAMAI-Kantar इंटरनेट रिपोर्ट, ONDC संबंधी दस्तावेजों और महिला उद्यमिता पर उपलब्ध अध्ययनों का उपयोग करता है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि UPI, Udyam/Udyam Assist, ONDC, सोशल कॉमर्स और मोबाइल इंटरनेट ने महिला उद्यमियों के लिए बाजार की भौगोलिक सीमाएँ घटाई हैं। फिर भी डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा, लॉजिस्टिक लागत, प्लेटफॉर्म कमीशन, ऋण-सुलभता, उत्पाद-मानकीकरण और सामाजिक गतिशीलता से जुड़ी बाधाएँ अभी भी गंभीर हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि सूचना प्रौद्योगिकी महिला उद्यमिता के लिए केवल तकनीकी साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय औपचारिकता और सामाजिक पहचान का संरचनात्मक माध्यम बन सकती है, यदि नीति-समर्थन, प्रशिक्षण, डिजिटल सुरक्षा और समावेशी प्लेटफॉर्म-डिजाइन को मजबूत किया जाए।
मुख्य शब्द: महिला उद्यमिता, सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स, UPI, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बाजार, MSME, ONDC.
भारत में महिला उद्यमिता का स्वरूप सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बाजारों के विस्तार के कारण तीव्र रूप से बदल रहा है। पहले महिला उद्यमिता प्रायः स्थानीय बाजार, घरेलू उत्पादन, सीमित पूँजी और पारिवारिक नेटवर्क पर निर्भर थी, परंतु डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने बाजार-प्रवेश, भुगतान-सुविधा, ग्राहक-संपर्क, प्रचार, आपूर्ति-श्रृंखला और वित्तीय पहचान की नई संभावनाएँ निर्मित की हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित है तथा सरकारी रिपोर्टों, MSME वार्षिक प्रतिवेदनों, डिजिटल भुगतान संबंधी PIB/RBI/NPCI स्रोतों, IAMAI-Kantar इंटरनेट रिपोर्ट, ONDC संबंधी दस्तावेजों और महिला उद्यमिता पर उपलब्ध अध्ययनों का उपयोग करता है। विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि UPI, Udyam/Udyam Assist, ONDC, सोशल कॉमर्स और मोबाइल इंटरनेट ने महिला उद्यमियों के लिए बाजार की भौगोलिक सीमाएँ घटाई हैं। फिर भी डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा, लॉजिस्टिक लागत, प्लेटफॉर्म कमीशन, ऋण-सुलभता, उत्पाद-मानकीकरण और सामाजिक गतिशीलता से जुड़ी बाधाएँ अभी भी गंभीर हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि सूचना प्रौद्योगिकी महिला उद्यमिता के लिए केवल तकनीकी साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय औपचारिकता और सामाजिक पहचान का संरचनात्मक माध्यम बन सकती है, यदि नीति-समर्थन, प्रशिक्षण, डिजिटल सुरक्षा और समावेशी प्लेटफॉर्म-डिजाइन को मजबूत किया जाए।
मुख्य शब्द: महिला उद्यमिता, सूचना प्रौद्योगिकी, ई-कॉमर्स, UPI, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बाजार, MSME, ONDC.