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ISSN: ISSN: 2349-2015 Impact Factor: 5.8 | Double-Blind Peer Reviewed | Open Access
Volume-12, Issue-2 (July-December) 2025 Pages: 83-98 Open Access DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.17112645

भारत में कॉरपोरेट क्षेत्र में दीर्घ कालिक वित्तपोषण के स्रोत और उनका तुलनात्मक अध्ययन

पीयूष कुमार गुप्ता
India

Abstract

शोध सार
यह शोध "भारत में कॉरपोरेट क्षेत्र में दीर्घकालिक वित्तपोषण के स्रोत और उनका तुलनात्मक अध्ययन" पर आधारित है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में उपलब्ध दीर्घकालिक वित्तपोषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान करना, उनकी लागत, लाभ, सीमाएँ और व्यवहारिक उपयोगिता का तुलनात्मक विश्लेषण करना है। इसमें आंतरिक स्रोतों जैसे रिटेन्ड अर्निंग्स और रिज़र्व्स से लेकर बाहरी स्रोतों जैसे इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर्स, टर्म लोन, विदेशी निवेश (FDI, ECB, ADR, GDR) तथा वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी तक की भूमिका का अध्ययन किया गया। शोध में वित्तीय अनुपात विश्लेषण, तुलनात्मक अध्ययन तथा सांख्यिकीय उपकरणों (जैसे सहसंबंध व प्रतिगमन विश्लेषण) का प्रयोग कर निष्कर्ष निकाले गए। परिणामों से स्पष्ट होता है कि भारतीय कंपनियाँ वित्तीय स्थिरता हेतु आंतरिक स्रोतों को प्राथमिकता देती हैं, किन्तु बड़े प्रोजेक्ट्स और वैश्विक प्रतिस्पर्धा हेतु बाहरी व विदेशी निवेश की ओर भी अग्रसर हो रही हैं। पूंजी बाजार एवं बैंकिंग प्रणाली की जटिलताएँ, उच्च पूंजी लागत और नियामक ढाँचे की चुनौतियाँ अभी भी बाधक बनी हुई हैं। अध्ययन इस बात पर बल देता है कि वित्तपोषण प्रणाली में सुधार, MSMEs व स्टार्टअप्स हेतु विशेष विकल्प और ग्रीन फाइनेंस जैसे दीर्घकालिक मॉडल अपनाकर भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की वित्तीय क्षमता और सतत विकास को सुदृढ़ किया जा सकता है।
कुंजी शब्द : दीर्घकालिक वित्तपोषण, भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र, इक्विटी शेयर, डिबेंचर्स, विदेशी निवेश, बैंक ऋण, वेंचर कैपिटल, पूंजी लागत, तुलनात्मक अध्ययन, ग्रीन फाइनेंस।