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ISSN: ISSN: 2349-2015 Impact Factor: 5.8 | Double-Blind Peer Reviewed | Open Access
Volume-12, Issue-1 (January-June) 2025 Pages: 234-244 Open Access DOI: https://doi.org/10.5281/zenodo.17284254

बिहार में भू सर्वेक्षण का निर्णय एवं सीमांत एवं लघु कृषकों की समस्याएं (सरैया प्रखंड के विशेष संदर्भ में)

भगवान राय & रवीन्द्र कुमार चौधरी
India

Abstract

सारांश
बिहार विशेष भू सर्वेक्षण, जो 2024 में मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड सहित पूरे बिहार में शुरू हुआ, भूमि स्वामित्व को डिजिटाइज़ करने और भूमि विवादों को कम करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह शोध पत्र सरैया प्रखंड में इस सर्वेक्षण के प्रभावों और सीमांत (1 हेक्टेयर से कम जोत) एवं लघु (1-2 हेक्टेयर जोत) किसानों की समस्याओं का गहन विश्लेषण करता है, जिसमें भूमि विखंडन, भूमि विवाद, ऋणग्रस्तता, संसाधनों तक सीमित पहुंच, बाजार की अनिश्चितताएँ, और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। सर्वेक्षण ने डिजिटल अधिकार अभिलेख (राइट ऑफ रिकॉर्ड्स) तैयार करने में प्रगति की है, जिससे किसानों को औपचारिक स्वामित्व और बैंक ऋण के लिए संपार्श्विक प्राप्त होने की संभावना बढ़ी है। हालांकि, जागरूकता की कमी, जटिल प्रपत्र प्रक्रियाएँ (जैसे प्रपत्र-2 और प्रपत्र-3), और स्थानीय समन्वय की कमी इसके प्रभाव को सीमित करती हैं। सरकारी योजनाएँ, जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM), इन समस्याओं को आंशिक रूप से संबोधित करती हैं, लेकिन बागवानी फसलों की उपेक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी कार्यान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न करती हैं। डेटा तालिकाएँ और ग्राफ सरैया में किसानों की स्थिति, जैसे 80% ऋणग्रस्तता और 55% सिंचाई सुविधा, को स्पष्ट करते हैं। इस अध्ययन से यह निष्कर्ष निकालता है कि भू सर्वेक्षण का प्रभावी कार्यान्वयन, जागरूकता अभियान, सरलीकृत प्रक्रियाएँ, भूमि एकीकरण, और वित्तीय समावेशन जैसे संरचनात्मक सुधार सरैया के सीमांत और लघु किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं।
मुख्य शब्द: बिहार विशेष भू सर्वेक्षण, सीमांत किसान, लघु किसान, सरैया प्रखंड, भूमि विखंडन, भूमि विवाद, ऋणग्रस्तता