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ISSN: ISSN: 2349-2015 Impact Factor: 5.8 | Double-Blind Peer Reviewed | Open Access
Volume-9, Issue-2 (July-December) 2022 Pages: 41-50 Open Access

गाँव की कहानियां और कहानियों में गढ़ते गाँव : कथाकार शिवमूर्ति

पुष्‍पा कुमारी
India

Abstract

सारांश–
शिवमूर्ति की कई कहानियां अपनी पठनीयता के बल पर लंबे समय तक स्मृति में अपना स्थान बनाए रखती हैं। गांवों को लेकर ऐसी पठनीय कथाएं हिंदी साहित्य जगत में सचमुच बेहद दुर्लभ हैं। मिसाल के लिए उनके कथासंग्रह ‘केसर-कस्तूरी’ में संकलित कहानियां अपने जबर्दस्त कथाविन्यास और आवेगमयी अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं। इसमें उनकी छह महत्वपूर्ण कहानियां संकलित हैं। ये कहानियां हैं-कसाईबाड़ा, अकालदंड, सिरी उपमा जोग, भरतनाट्यम, तिरिया चरित्तर और केसर कस्तूरी। सारी की सारी कहानियों में ग्रामीण परिवेश प्रधान है या ग्रामीण परिवेश से शहर में आकर बसे लोग जिनका गांव से संबंध सुखद या दुःखद ढंग से अभी बरकरार है। शिवमूर्ति का साहित्य स्वातंत्र्योत्तर भारत के वर्ण-जाति के पंक में आकंठ धसे गांवों की हकीकत से परिचित कराने वाला साहित्य है। उनके गांव रहस्यमय कल्पनाओं से आवृत भी नहीं हैं जहां इंसान से ज्यादा ध्यान चिड़िया की टींटी-टूटू पर जाए। उनकी कहानियों में चित्रित गांव में हर तरफ आतंक है और यह आतंक सीधी गोलाबारी या हिंसा से नहीं बल्कि बहुत महीन स्तरों पर सरकार-राजनीति और सामंती संस्कृति के बीच से पैदा षड्यंत्रों के सहारे फैलाया गया है।